Zamana hogya hai

इन आँखों को आदत थी
उसका चेहरा देखने की
अब उसे देखे हुआ
ज़मान हो गया

उसके घर के सामने
होता था बसेरा मेरा
अब तो उसकी
गली में गए हुए
ज़माना हो गया

थकता नही था मैं
उसकी बात करते हुए
अब उसका नाम लिए
हुआ भी

                              ज़मान हो गया 

उसका नाम मेरे नाम के साथ
आज भी जोड़ा जाता है
जिसे अलग हुए

                               ज़माना हो गया
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waah kya baat hai…
aap bahut acha lekhte hai… @Shubh_Namdev

Thank you so much​:slight_smile::slight_smile: