Zalima Bahar to aa

तेरा इंतज़ार कर रही

अरे-हाँ!! इधर मैं सिर्फ़ तेरा ही ज़िक्र कर रही

तू आ तो सही बाहर

तेरे दीदार को तड़प रही

मैं इतने देर से सिर्फ़ तुझे ही याद कर रही

दरवाजे से ना ही सही अपना दीदार इस

बंद खिड़की से करवा जा

मेरी आँखे तरस रही

अपनी तलब एक छोटे से झलक सी मिटा जा

अरे-हाँ!! तू ही एक बार फिर बाहर आ जा

जी भर के देख लेने दे मुझे तू

खुदा की बनी उस ख़ूबसूरत इंसान को

मेरी ज़िंदगी सफल हो जानी आज

सारी उम्मीदें फिर से एक बार जी जाने दो

मेरी आँखो को अपनी एक बार फिर झलक दिखा दो

ये ज़ालिमा तू एक बार तो बाहर आ जा

दिल भी मगन हो जाएगा

रूह भी तेरी “नूर” का सुकून पाएगा

एक बार झलक तो दिखा जा

मेरे ज़ालिमा मुझे फिर-से तुझे इश्क़ होजाएगा

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Stupendous!
and
welcome back again
keep writing and sharing :slightly_smiling_face:

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Thankyou :blush:

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