Yaad uski!

चलो आज उसकी प्रतिमाओं की रचना करते हैं,
उसकी कलाई में पड़े हुए कड़े की कुछ चर्चा करते हैं,
है सुभाग्य हमारा जो उसको हम कभी कभी तबियत से देख लिया करते हैं,
उसकी मुस्कान और सादगी की हम हमेशा पहचान करते हैं,
कुछ लम्हे जी लेते हैं,
कुछ यूँही उसके नाम करते हैं,
और चर्चाएं उसकी हम सुबह शाम करते हैं ।
अन्दाज़िया बयाँ करता है तुम्हारी ,
ये हवा का झोंका है !
कुछ रुमानियत पे सवाल करता है ये तुम्हारी ।
इंतज़ार कर रहा हूँ उसका,
कुछ समय और उसके लिए सही,
दीदार कर रहा हूँ उसका,
बहुत रची है तस्वीर उसकी ,
इश्क़मुतासिर कर रहा हूँ उसका
बेहतरीन अगाज़ और बेहतरीन सवाल करती है ।

जुपिटर

4 Likes