True Shayari

ख़ामोशी भी क्या चीज़ है
आहट पहचान लेती है
एक दूसरे की जज्बात
जान लेती है
अब रहा न दम
अब रहा न दम
किसी पर विश्वास करने की
यहाँ तो
अपने ही अपनों की जान लेते है

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