Tribute to Rahat sir

आज भी आपके तराशें हुऐ लफ़्ज़ों के मायने तलाश रखता हूं।
में ख़ुदा से आपकी मग़फ़िरत की दरख़ास्त रखता हूं

बुलंद दरजा जो दुनिया मे रहा आपका।
वही उस खानकाह में मिले हाथ उठा के रब से फ़रयाद रखता हूं

आज रोशन जो हुआ आसमाँ ,तो ग़ैब से आवाज़ आयी
ज़मी में दबा कर में भी अपने क़रीब कुछ मेहताब रखता हूं

Shah Talib Ahmed

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Bohot khub likha hai❤️

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Bahut bahut shukriya