सपने बुन साहित्य के बुनकर....।

सपने बुन साहित्य के बुनकर ,
सपने बुन साहित्य के बुनकर ।
तू अमृत उगल ,कटु वचन भी सुनकर ।
सपने बुन साहित्य के बुनकर …।

जुलाहा है तू शब्दों की दुनिया का ,
शब्दों को सजाते जा , शायरी की धुन पर ।
सपने बुन साहित्य के बुनकर ,
सपने बुन साहित्य के बुनकर ।

अपनी कालिमा को लालिमा मे तब्दील कर,
सही रंगों के मिश्रण को चुनकर ।
सपने बुन साहित्य के बुनकर ,
सपने बुन साहित्य के बुनकर ।

         - शाहीर रफ़ी
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very well penned :+1:

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Try to engage on other posts too brother.

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