हां तुम याद हो मुझे!

कैसे भूल सकती हूं तुम्हें,
आज जो भी हूं,
वो तुमने ही तो बनाया है…,
मुझे रोते पर हंसना सिखाया है,
और हंसाते हंसाते कई बार रुलाया है,
हां तुम याद हो मुझे!

कैसे भूल सकती हूं तुम्हें,
आज जो भी हूं,
वो तुमने ही तो बनाया है…,
हार कर भी खुश हो ना
मुझे तुमने ही सिखाया है,
और जीत कर भी हार जाना
तो बस तुमसे ही हो पाया है,
हां तुम याद हो मुझे!

कैसे भूल सकती हूं तुम्हें,
आज जो भी हूं,
वो तुम ने ही तो बनाया है…,
तुम कुछ कहते थे ना…,
क्या था वो ?
हां याद आया, “तुम पागल हो पूरी”
यहां थोड़ी गलत निकले तुम,
हां हूं मैं पागल! “पर पूरी नहीं”
मुझे पता है,
मेरे लिए सही और गलत क्या है,
हां तुम याद हो मुझे!

कैसे भूल सकती हूं तुम्हें,
आज जो भी हूं,
वो तुम ने ही तो बनाया है…,
तुम्हारी हर बात याद है,
हर छोेटी-छोटी बात पर
तुम्हारा फिक्र करना,
मेरा तुम्हारा…,
मेरे हर लम्हें में जिक्र करना,
हां तुम याद हो मुझे!

कैसे भूल सकती हूं तुम्हें
आज जो भी हूं,
वो तुमने ही तो बनाया है,
तुम ना टाइम टेबल की तरह हो,
“समय के पाबंद”
और मेरी तो समय से कभी बनी ही नहीं,
शायद वजह यही रही होगी तुम्हें
“फॉलो” ना कर पाने की,
पर कोशिश की थी मैंने
कई बार तुमसे कदम मिलाने की,
हां तुम याद हो मुझे!

कैसे भूल सकती हूं तुम्हें
आज जो भी हूं,
वो तुमने ही तो बनाया है,
एक सवाल है तुमसे इसका जवाब जरूर देना,
मेरे इस जज्बातों को आकार जरूर देना,
“आएै ही क्यों जब जाना ही था”
और “जाने की ऐसी क्या वजह रही
जिसका कोई बहाना नहीं था”
हां तुम याद हो मुझे!
©ashigupta

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Interesting one
bahut accha post hai
plus, chota nahi hai,
padhne me bahut maza aaya
kuch aise hi or post or kuch aap jaise hi log
aate rahe to zindagi bahut acchi rahegi :slightly_smiling_face:

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This is so beautiful

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Thank you :grinning::blush::blush:

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Thank you :blush: