मतलब और पहचान

मतलब निकल गया है तो पहचानते नही

यूं जा रहे है जैसे हमें जानते नही, मतलब…

अपनी गरज थी तब तो लिपटना कबूल था

बॉहों के दायरे में सिमटना कबूल था

अब हम मना रहे है मगर मानते नही, मतलब…

हमने तुम्‍हे पसन्‍द किया क्‍या बुरा किया

रूतबा ही कुछ बुलन्‍द किया क्‍या बुरा किया

हर इक गली की खाक तो हम छानते नही, मतलब…

मुॅह फेर के न जाओं हमारे करीब से

मिलता है कोई चाहने वाला नसीब से

इस तरह आशिकों में कमॉं तानते नही

मतलब निकल गया है तो पहचानते नही

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Welcome to the new YoAlfaaz @Anshul, hope you like this website. And amazing lines as always :slight_smile:

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@Anshul is back with great response and posts :slightly_smiling_face:
happy to see you back friend

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