शिकायतें आंखों की

मुझसे ही मेरी शिकायतें करती हैं
मेरी आँखें भी मुझसे बातें करती हैं।

बोलती हैं! उसकी एक झलक को तरस रही हैं
तूने दिल तोड़ा उसका, सजा हम क्यों भुगत रही है,

मै बोला! मैन भी तो प्यार किया उससे, तुमने तो सिर्फ उसे देखने की आदत डाली
मैं भी तो उसके प्यार को तरस रहा हूँ, तुम ही थोड़ी तरस रही हो खाली।

बोली! हमसे अब ओर नही रुका जाता, हो जाएंगी हम नम,
चला जा उसके पास दीदार कर दे और करदे हमारी बेचैनी कम।

मैं बोला! कैसे जाऊ मैं उसके पास, जब वो देखना ही नही चाहती मुझे
जब नही रुक जाता, नही सहन होता तो आदत नही डालनी चाहिए थी ना तुम्हे।

बोली! तू भी ना करता प्यार, जुदाई का दर्द तेरे से भी तो नही सहन हो रहा।
मैं बोला! चुप रह मेरी ना सोच सहन हो या ना हो पर तेरी तरह तो नही रो रहा।

बोली! आंख हूँ, रोना तो आंखों की फितरत में होता है,
दिखता है मुझे अंदर का भी, तू भी तो अंदर अंदर उसके लिए रोता है।

क्या करूँ प्यार करता हूँ उससे, चल आजा सोते हैं साथ मे,
तुझे भी दिख जाएगी वो सपने में, रोज मुझे दीदार होता है उनका ख्वाब में।

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Khubsurat :blue_heart:

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