इश्क़ की हद्द

हदों के दायरे में रह कर पहचान बनाना चाहते हो, एक दीवाने की,
जो चार गालियां तुमने नापी, सोचते हो वही दूरी है मंज़िल पाने की,
हदों को जानना है घर इश्क़ की तो सुनो हमसे,
अपनी जान हम कीमत अदा कर सकते हैं सिर्फ उनके एक बार मुस्कुराने की।

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