मैं चाहती हूँ।

मैं उड़ना चाहती हूँ…
आसमां में, पर जमीं की आँचल पकड़ कर;
मैं गिरना चाहती हूँ…
जमीं पर, पर आसमां की चादर पकड़ कर;
मैं दौड़ना चाहती हूँ…
अनंत तक, पर अंत को अपने हाथों में जकड़ कर।।

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very nice post
rhyme, composition, words everything is fine
keep going friend

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:heart::heart:

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