तभी मैं उसे भूल पाऊंगा

उसके ख्यालों से निकल के तू भी मेरी तरह अपनी गुत्थी सुलझा,
दिमाग दिल से बोला मेरी तरह पक्का बन और तू भी उसे भूल जा,

पता है ना वो पतंगें उड़ नही पाती जिनकी डोर उलझ जाती है,
दिल बोला डोर में टोटा करना पड़ता है यूँही नही डोर सुलझ जाती है,

चल कहता है तो मान लिया अब मैं भी अपनी गुत्थी सुलझाऊंगा,
तू टोटा कर धड़कनों का तभी तो मैं कुछ कर पाऊंगा,

के तू टोटा कर धड़कनों का तभी तो मैं कुछ कर पाऊंगा,
कटेगा संपर्क मेरा धड़कन से तभी शायद इस जहां में मैं उसे भूल पाऊंगा।

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Khubsurat. :thought_balloon:

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Dhnyawad…

lajawab…

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Dhanwad veer

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