कितना मुश्किल है कुछ कहना

कितना मुश्किल है कुछ कहना…
के नामुमकिन है अब तुम्हारे बिना रहना,
याद आती है जब तुम्हारी तो गंगा से
भी तेज होता है आंखों से अश्कों का बहना,
सब खत्म अब, किसके पीछे भागूं मैं,
तुम ही तो हो मेरी ज़िंदगी का बेशकीमती गहना,
दिल सिर्फ यही चाहता है के देखता रहूँ तुम्हे,
हर वक़्त तुम मेरी आँखों के सामने रहना,
कितना मुश्किल है कुछ कहना…
के ज़िन्दगी से भले ही चली गई हो लेकिन
दिल में ज़िन्दगी भर तुम ही रहना,
कितना मुश्किल है कुछ कहना…
कितना मुश्किल है किसी से कुछ कहना।

                              Ankush
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