लोगों का मिलना - बिछुड़ना

“समय के प्रवाह को आज तक कोई नहीं रोक पाया है,
जिसने चलने की ठान ली हो उसे कभी कोई न स्थिर कर पाया है, मिलना - बिछुड़ना तो इस दुनिया की रीति है प्यारे,
फ़िर क्यूँ जीवन में अँधेरा समाया है…!”

सोशल नेटवर्किंग साइट पर प्रतिदिन लोगो का मिलन होता है, फ़िर बातों का सिलसिला चलता है,
और इंसान दिमाक के घोड़े पर सवार होकर लंबे सफ़र पर निकल जाता है।

एक समय ऐसा भी अवश्य आता ही है,
इंसान घोड़े की चाल को चलाएमान न रख पाता है।

कभी जो अपना मान कर दिए थे यादों भरे उपहार,
उनके अस्तित्व को ही मिटाना चाहता है।

इंसान भी कितना बेवकूफ़ है ना,
कभी दूसरे को समझना चाहता ही नहीं है…!

जब किसी को अपना माना जाता है तो,
उसकी यादें दिमाक तक ही सीमित नहीं रहती है,
वो आत्मा तक का सफ़र तय कर ही लेती हैं।

यदि इंसान सामने वाले को अपना समझे ही ना,
तो उसकी बातों का, उसकी यादों का पहरा एक पल भी न रह पाता है।

इसका अंत तो संभव नहीं है,
इसलिए यही कहना है जीवन में खुश रहो,
और अपने आसपास खुशियाँ लुटाते रहो… :blush::hugs::pray:
Kittu_ki_diary

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bikul sahi kaha tumne
waise bhi, aaj kal log duniya bhar ki khusiya batorne me lage hue hai,
or jo unke pass hai, uspe wo dhyaan hi nhi dete. Jo mila zindagi me, use chod kar kuch or hi paane me lage hue hai log.

nice post friend @Kittukidiary

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@Ravi_Vashisth जी और शुक्रिया… :pray::innocent:

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Once again a beautiful post

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@navjyotsingh.rajput शुक्रिया… :innocent::pray:

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