नासमझ

चंद अल्फ़ाज़ लिख के वो खुद को मीर समझ बैठा,
दो चार लोगों से वाहवाही क्या जुटा ली…
वो इसे हाथों की लकीर समझ बैठा,
और कुछ पल को शोहरत
जब जमाने से थककर
उसके दर पर आराम करने को बैठा…
तो वो नासमझ इस को खुद की तकदीर समझ बैठा!!

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bahut khoob bahut khoob
@Rupa_dey you really write very well
we are blessed to have writers like you my friend
thanks for being a part of our family, i.e. YoAlfaaz family
keep writing and sharing your work

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Your works are really good

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