वह तो नारियल है(पापा)

वह पत्थर सम दिखता
चट्टानों सा पहाड़ी सम
हिय में जैसे सिमटा वन
पर सच, वह तो नारियल है

पत्थर से बदन में अपने
मुरूम समेटे अपने भीतर
दिखता है मजबूत बहुत
पर सच, वह घावों में मरहम है

थोड़ी - थोड़ी बात में डाटे
वह अनुशासन प्रेमी है
पढ़ने को दिन भर बोले
हम डर के मारे पुस्तक खोले

खुद ना हसने वाला वह
मेरी हसी का प्रेमी है
हर जरूरत फीकी पड़ जाती
जब बच्चो की जरूरत आ जाती

सबकी फरमाइश पूरी करने वाला
वह एक पिता श्रमिक है
कोई और नहीं मसीहा है
वह मेरा प्रिय जनक है

Written by:Swati Singh Chauhan# poetry competition

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Wow so beautifully written :pleading_face::heart:

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Thanks tanya