पापा कोई नहीं आप जैसा।

आज आप इस दुनिया में नहीं,
लेकिन आपकी यादें हमेशा रहेंगी,
आप थे ऐसे इंसान,
जिनकी पुर्ती है असंभव,
आपकी हर बात हट के थी,
शायद मुझे किसी और में नहीं दिखी।

आता वो दिन याद,
जब भी आप छुट्टी आते,
मेरी भी साथ में छुट्टी करवाते,
मां के डर से किताबें लेकर बैठता,
आप तुरंत बोल देते,
अभी परीक्षाएं हैं दूर,
अभी कर लेने दो मस्ती,
मां बेचारी गुस्सा होकर चली जाती,
और मैं चुपचाप किताबें बंद करता,
और आराम से फ़िल्म देखता।

एक ओर बात,
जहन में आती,
आपके होते,
पैसे की कमी नहीं होती,
जितने मांगों मिल जाते थे,
और मैं उन्हें रेड़ी पे खर्च कर डालता।

आपकी सबसे बड़ी बात थी,
आपकी ईमानदारी,
आप हमें भी यही कहते थे,
कम में गुजारा कर लो,
लेकिन हेराफेरी में मत पड़ो।

आपकी एक और बात,
बहुत अचभें वाली थी,
आप हर चीज को बहुत संभाल कर रखते थे,
आपकी वो टाईटस की घड़ी,
आती है याद,
जो न कभी खराब होती थी,
और न कभी धोखा देती थी।
आपके पास जुते,
कम से कम दस साल चलते थे,
और मैं दस साल में,
छह सात बदल लेता था।

अगर चाहूं,
तो आपके वारे में,
लिखता चला जाऊं,
मैंने ऐसा किफायती इंसान नहीं देखा,
चाहे कुछ भी हो,
अपने बच्चों और वीवी की हर फरमाइश,
पुरी करता हो

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शुक्रिया आरती जी।