हालात आज के

हालात आज के जो है इन को कैसे लिखा जाए
इंसान मार रहे इंसान को इन से अब क्या सीखा जाए।

धर्म के नाम पर लड़ते है, जात- पात में बटते है
जो बोले खिलाफ इनके वो बिच चौराहे कटते है
तुम ही बताओ इस नफरत को कहा छुपा के रखा जाए
हालात आज के जो है इन को कैसे लिखा जाए।

कभी नक्सलवाद ने कभी आंतकवाद ने कितना कहर मचाया है,
नाम जिहाद का लेकर कितने निर्दोषों का खून बहाया है,
अपने अपनो का करते कत्ल अब, इन को कैसे परखा जाए
हालात आज के जो है इन को कैसे लिखा जाए।

पैदा होने से पहले बेटी का गला दबाया जाता है,
नाम दहेज का लेकर उस को जिंदा जलाया जाता है,
इश्क़ के नाम पर मारे गोली, इन हैवानों को किसलिए बख्शा जाए,
हालात आज के जो है इन को कैसे लिखा जाए।
श्याम जांगड़ा