दिल जो टुटा मेरा ।

दिल जो टुटा मेरा मैं जुड़के भी जुड़ न सका
आई जो याद तुम्हारी मैं रोकर भी रो न सका

आँखों में आँशु थे मेरे वो फिर भी न रुका
जब जा रहा था मुझे दूर उसने मुड़के भी न देखा
दिल जो टुटा मेरा जुड़के भी जुड़ न सका
आई जो याद तुम्हारी मैं रोकर भी रो न सका

दिल जो टुटा मेरा जुड़के भी जुड़ न सका
वो हँसता चेहरा तुम्हारा अब न आँखों से हटा
बिखरा था जो जाने से तुम्हारे फिरसे मैं सवर न सका
दिल जो टुटा मेरा मैं जुड़के भी जुड़ न सका
आई जो याद तुम्हारी मैं रोकर भी रो न सका

रोया छिपकर अँधेरे में बहुत आया जो उजाला तो मैं मुस्कुरा दिया
आई जो याद तुम्हारी मैं मुड़ कर भी मुड़ न सका
दिल जो टुटा मेरा जुड़के भी जुड़ न सका
आई जो याद तुम्हारी मैं रोकर भी रो न सका
-Akash Rajput

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Beautifully written👌

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Thank you :heart::heart:

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