बेशकीमती

जब भी कोई दुख मुझे दस्तक देने वाला होता
उन कोमल हाथो ने उन्हें तलवार हो जैसे रोका
हर वक्त मेरे खातिर हाज़िर रहती थी तुम मा
मै और मुझसे ही पूरा होता था तेरा जहां

हर रोज़ मुझे नहलाती खाना पेट भर खिलाती
दो के बदले चार रोटियां तुम थी जबरन लाती
रात में मुझको गोद सुलाना वो जो तेरा अपनापन था
कितना अच्छा कितना प्यारा मेरा वो बचपन था

आज तुम्हे जब मेरी जरूरत थी
मैंने काम को समझा आवश्यक
मै भूल रही थी मै तो तेरी अभी भी छोटी बिटिया
मुझसे ज्यादा कहा था प्यारा, तुमको पैसा रुपया

इस भागदौड़ और आंधी दौड़ में
रिश्तों को ना भूलो
कीमत लगती मोती, हीरे की
मा का प्यार न तौलो

वह बेशकीमती समय, जो बीता मा तेरे गोदी में
ना खरीद सकी मै तेरी थपकी
स्वाद वो तेरी रोटी का
इस चकाचौंध मंडी में

इस दुनिया में मेरी मा
बस प्यार तुम्हारा सच्चा
बेशकीमती प्रेम तुम्हारा
और वक्त हमारा सच्चा

स्वाती सिंह चौहान

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Beautiful❤️

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