ज़िंदगी तू कहाँ खो गई ...।

ज़िंदगी तू कहाँ खो गई …।
घर आ जा अब रात हो गई ।
ज़िंदगी तू कहाँ खो गई ।
उम्र ने चुरा लिए मेरे खुशियों के पल,
वह मस्ती ,वह नादानी,वह मन चंचल ।
पुराने किस्सों की छाप को ,
यादों की एक लहर धो गई ।
ज़िंदगी तू कहाँ खो गई ।

  • शाहीर रफ़ी
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Osm dude

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Brother @Shaheer_Rafi , what you are best is surprising us. Your selection of words and phrases is really great and I personally am very much pleased with it.
You keep on giving us surprises like this and we’ll love to read you more and more.
great man :+1::+1::+1:

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Life is lost
Or are we lost ?

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