आखिर क्यों?

तुम दुःखी हो अपने कल से,
मैं परेशाँ अपने आने वाले कल को!
तुम सोचते “ये सब कल क्यों हुआ?”
मैं कहती “अब कल क्या ही होगा.?”
समझ नहीं आता कि हम,
अपने आज के आज में
जीना क्यों नहीं चाहते…!
शायद भाग रहे हैं…
अपने किरदार से,
गुमराह कर रहे हैं,
बेवकूफ़ सी ज़िंदगी को
और सहज हो रहे हैं,
अपने अकेले के अकेलेपन में. कहीं न कहीं ये सब
कारगर भी हो रहा है,
जो हर शख़्स आज
अंधेरे में भी अंधेरा
खोज रहा है…!!

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Shayed! :thought_balloon:

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:innocent:

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