अल्फाज़ नहीं हैं (محمد طیب)

अल्फाज़ नहीं हैं
मेरी मुहब्बत को यूं बयां करने के लिए
दिल में जो इबादत है
नाम लेकर उसको रुसवा करने के लिए
अल्फाज़ नहीं हैं
खुद को तुझमें यूं फ़ना करने के लिए
अल्फाज़ नहीं हैं
मेरी मुहब्बत को यूं बयां करने के लिए

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:heart: