जिन रास्तों पे मंजिल ना हो

जिन रास्तों पर मंजिल ना हो उन पर चलना छोड़ दिया है हमने,
किसी और से अब और नहीं,
अब सिर्फ खुद से उम्मीदें की हैं हमने,
जो अपने घोंसले में समेटे हुए कुछ सपने लिए बैठे थे,
पंख तो थे मगर कभी उडने के ख्वाब से भी डर से जाते थे,
आज पंख फैला के उडान भरने की सोची है हमने,
कुछ दूर निकल कर ही सही, अपनी कामयाबी देखी है हमने,
यूँ इतना आगे आकर पीछे देखना छोड़ दिया है हमने,
जिन रास्तों पर मंजिल ना हो उन पर चलना छोड़ दिया है हमने।

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Beautiful💙

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Thank you :blue_heart:

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