किसी रोज़ याद आऊंगा मै

इक दिन याद आऊंगा तुम्हे
बचपन की उस पहली किताब की तरह
और ठहर जाऊंगा होठों पर ,
एक गीत बनकर

मै याद आऊंगा तुम्हे
लड़कपन के उस मोह की तरह
और ठहर जाऊंगा आंखो में ,
वोह प्रीत बनकर

मै याद आऊंगा तुम्हे
जवानी के उस मोड़ की तरह
और ठहर जाऊंगा , तेरे दिल में
एक कसमसाहट की तरह

मै याद आऊंगा तुम्हे,
उस पुराने जख्म की तरह
और घेर लूंगा तुम्हे दर्द में
एक आवरण बनकर

कई मुद्दातों बाद ,
मै याद आऊंगा तुम्हे
किसी भूले बिसरे किरदार की तरह
चुभता रहूंगा , एक टीस बनकर

सालों बाद ,किसी रोज
याद आऊंगा तुम्हे
तुम्हारी ही किसी प्यारी चीज की तरह
जिसकी तलाश में , तुम
खुद को खो दोगी ,
मेरा बनकर

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Wah❤️