क्रांति नहीं करती संकोच

आंसू गैस और पानी की तोप,
किसान पर सरकार का प्रकोप,
भूख, ठंड और खौफ़ -ए -मौत,
इन सब से क्रांति नहीं करती संकोच।
आक्रोश है ये इनका गलत के खिलाफ़,
प्रतिरोध है ये है, इंकलाब की आवाज,
एक बार गौर से करो इस बात एहसास,
आंदोलन है ये इंसाफ और हक्क की आवाज़।

तकलीफ से कभी पस्ट हुए नहीं।
इनके जैसे किसी ने कष्ट सहे नहीं।
अब भूल कर संकोच तुम भी आवाज उठाव।
इन कमज़ोर उँगलियों से ताक़तवर मुट्ठी बनाओ।
अपने हक्क की आवाज़ तुम अपने गले में लाओ।
आओ सब साथ मिलों और अत्याचार को मिटाओ।
आओ अब जो ना आए तो अकेले रह जाओगे।
इस शोषण की धारा मे तुम भी बह जाओगे।

ऐ सर्वहारा ऐ अन्नदाता,
तुम ईश्वर के हो विधाता।
तुम पर प्रहर भी पाप है,
ये नेता जहरीले साँप है।
इनके मधु में भी है ज़हर,
ये ही धाते है तुम पर क़हर।
इनकी राजनीति से लड़ना होगा,
साहस का ये घुट भरना होगा।
तुम्हें इंकलाब करना होगा।
तुम्हें इंकलाब लाना होगा।

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