मंज़िल की क़दर

राह में जब आप हमसफर है।
अब भला मंज़िल की किसको फिकर है।

मेरी कोई बात मुक़म्मल नहीं।
जबतक उनमे होता नही आपका ज़िकर है।

Shah Talib Ahmed

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Kya baat. :heart:

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Bahut shukriya

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