वो वक़्त

वो वक़्त कुछ और था।
ये वक़्त कुछ और है।

तब तक तुम मेरी अमानत थी।
अब तुम्हारा हक़दार कोई और है।

सब पाकर भी तेरी महफ़िलों में सन्नाटा है।
सब खो कर भी मेरी तन्हाई में शोर है।

वो वक़्त।।

Shah Talib Ahmed

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:heart::heart:

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Lots of thanks

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