अभी भी वक्त है

याद करके गुनगुनाता
बिसरी बाते क्यों सुनाता
दर्द में क्यों मुस्कुराता
अभाव उसका , मुझे तू क्यों जताता
क्यों पास किसी के जाने ना दे
साथ किसी का पाने ना दे
खिलेगी फिर से धूप सुनहरी
दिल तू ऐसे बहाने ना दे
क्यों उलझा है , डोर में ऐसे
जिसकी गांठ कब की खुल चुकी है
तू ही बैठा है राह में उसके
वोह कब का तुझको भूल चुकी है
तू धूल लिए आंखो में घूमे,
जहां हवा का नाम नहीं ही
अभी भी वक्त है ,
छोड़ दे राह को ,
जहां पर तेरा काम नहीं है

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Kya bat. :revolving_hearts::sunflower:

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:heart::heart:

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:star_struck::star_struck::star_struck:

Bohot khoob…

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Wah wah

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