मिलो तुम

मिलो तुम,
हकीकत के पर्दे से कहीं दूर,
नदी के किनारे,
ख़यालो के बागान में।

मिलो तुम,
उन सवालों में,
जिनके जवाब सिर्फ है,
तुम्हारे पास।

मिलो तुम,
रात की अंधेरी रात में,
जहा हर कोई सोया हो,
हमारे सिवा।

मिलो तुम,
ऐसी घड़ी में,
जहा सब शून्य सा हो,
एक दूजे की खोज से दूर।

मिलो तुम,
सरहद पार मुझे,
वहा जहा इंसानियत का घर है,
और प्रेम की माया।

मिलो तुम,
ऐसे सम्मेलन में,
जहा लिन हम हो,
एक शांत जहां के आकाश में।

मिलो तुम,
ऐसे भंवर में,
जहा हर कोई डूबा हो,
और हम उभरे हो।

मिलो तुम,
एक ऐसे संसार में,
जहा तुम से शुरू,
और तुमपे ख़तम ये समय हो।

मिलो तुम,
जब भी तुम्हारा दिल करे,
बस वो दिल हमसे मिलने को बेताब हो।

  • रित्ती :maple_leaf:
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