होता है।

दर्द और ग़म वक़्त वक़्त पर “Depend” होता है।
फ़िर कॉफ़ी वक़्त इसी पर “Spend” होता है।

दर्द को पन्नों में उतारने का अलग ही “Talent” होता है।

और जो दर्द में मुस्कुराते है , उसमे बहुत “Confident” होता है।

Shah Talib Ahmed

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Kafi alag aur bohot khub👌

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Uff!!!

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Yep…