** नारी **

जिसे कहते है माँ जग जननी, उसका अर्थ है प्रकृति,
जिसमें सहने की हो अपार शक्ति, है खूबसूरत उसकी आकृति |
जग की जननी है नारी, तो मर्द की शक्ति है नारी
नए जीवन को जन्म देती है, वो ममतारूपी माँ है नारी
बेटी, पत्नी, बहु, माँ का किरदार निभाने वाली,
वो वसुधा का रूप है नारी
सबको समेटे अपनी आँचल में, वो ससक्त, साकार है नारी
जिसको कोई झुका न सकें, वो आत्म - निर्भर है नारी
कूट -कूट कर करुणा भरी हो जिसमें, वो करुणामयी है नारी
हर दुःख चुप - चाप सहन करे जो, वो दुखनिवार्णि है नारी
रक्त में जिसके प्रेम बहे, वो प्रेम की मूरत है नारी
जब भंग करे कोई मान उसका, वो चंडी का रूप है नारी
हर रूप में जिसकी अग्निपरीक्षा हो, वो राम की सीता है नारी |
अपमान मत करना नारियों का, इनके बल पर जग चलता है
पुरुष जन्म लेकर भी, इन्हीं की गोद में पलता है |
सब सम्मान करो नारी का, हर रूप इनका निखरता है
चोट मत दो नारी की आत्मा को, इनका भी दिल दुखता है
सब सम्मान करो नारी का, हर रूप इनका निखरता है ||

@Monika_Kumari

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Bohat khub :clap::clap::ok_hand:

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Thank You @Thehouseoflekhani

Great post. :heartpulse:

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