अजीब सी उल्जन

दिन चैन खो सा गया।…

मायुस नही पर खुशली भी मौजुद नही।

भाव…अल्फाज़ ना कोई …
बस बने हुए हैं शब्दो में।

आरज़ू में कही हसी लापता हो चुकी मान लो आप।।
उमंग थाम सा।

रंग थोडा फीका सा।।
खैर कोई ना!!!

अल्फाज़ आपके फिर उठ खडे होन्गे।।

भाव तोह आएंगे वापस।।

बस… मुस्कुरा दोना…

इंतज़ार उस मुस्कान बहोत व्याकुल क्र्देता.

प्यारे हो आप।…गहने आपके मुस्कान ।।

उमीद आपकी ताकत और आपकी कलम आपकी पहचान।।

लेकिं नूर आपका…

प्यारा और प्यार।।

पग्लू।।

हस भी दोंन
याद आपकी आ रही…

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:heart::heart:

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