हाथों में जुगनू लिए

हाथों में जुगनू लिए वो सूरज खोज ने निकला है ।
दिन में जुगनू दिखते नहीं
और रात में कब सूरज निकला है।
अब कैसे समझाए उसे
हाय वो कैसा पगला है।
हाथों में जुगनू लिए वो सूरज खोज ने निकला है ।

सच्चाई का लबादा ओड़ के वो झूठ बेचने निकला है।
दल-दल में पाँव जमेगे कैसे
वो सख्त ज़मीन पर फिसला है।
अब कैसे समझाए उसे
हाय वो कैसा पगला है।
हाथों में जुगनू लिए वो सूरज खोज ने निकला है ।

समझ का फेर ही होगा शायद
कि वो मेरे दुःख में खुशी से उछला है।
वो तो बरसों से दोस्त था मेरा,जाने कैसे बदला है।
अब कैसे समझाए उसे
हाय वो कैसा पगला है।
हाथों में जुगनू लिए वो सूरज खोज ने निकला है ।
हमीदा

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:clap::ok_hand:

:heart_eyes: waah @Hamida

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Wah. :heart: