अब क्या जताने आए हो

बचा ना कुछ मेरा अब मुझमें ,
क्या बचाने आए हो
रुखसत कर चुकी , प्राणवायु अब
क्या निभाने आए हो
आंखे टिकी थी , जो राह को तेरी
पथरा गई सिर्फ एक झलक से
क्रूरता का अब कौनसा , पाठ पढ़ाने आए हो
कभी वार दिया था ,खुद को पूरा
तेरी एक आवाज़ पर
क्या मिला था उससे तुमको,
अब क्या सुनाने आए हो
दिल तो था उसी पल से तेरा
सांसे भी अब सौंप चुके हम
बचा ना कुछ मेरा अब मुझमें
अब क्या ले जाने आए हो
लहराती जुल्फों संग , उन कजरारी काली आंखो का खेल
रहा ना मोह अब , मुझे किसी का
अब क्यों रिझाने आए हो

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:heart::heart:

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