मेहबूब ❤️

ये हैं…
बंदिशों और मज़बूरी में दबी हुई मेरी मोहब्बत की वो आवाज़ ,
जो हर रोज खुद के मिट जाने पर एक निशान 2 पंक्तियों के रुप में छोड़ जाती हैं और फिर अगली सुबह फिर जाग पड़ती हैं उसी दबिश में ,
ये उम्मीद लिए कि हो सकता हैं वो दिन आज का हो जब मेरी आवाज की सराहा जाएगा , भले ही मुझे अपनाये नहीं मेरा मेहबूब कभी… पर कम से कम मुझे गले तो लगाएगा…!!
:relieved:

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Bohot khoob likha hai.

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shukriya :hugs:

Dreaming lead people towards happiness … Keep moving …

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yeah🤗

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Jaroor❤️

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:hugs:

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