मुझे तुमसे इतनी आस क्यों है

बिखरे हुए, आज मेरे अल्फ़ाज़ क्यों है
दरमियान हमारे यह काश क्यों है

ना तुम हो मेरी, ना मै तुम्हारा
फिर कुछ खोने के डर से, मन निराश क्यों है

ज़मी के हर चांद में, खोजुं टुकड़ा तेरे अक्स का
इस दिल को असम्भवता की इतनी प्यास क्यों है

ना थे साथ कभी हम, ना हो सकेंगे कभी
ऐ दिल,
सब जानकर भी तू हताश क्यों है

इस जमाने में नहीं, तो उस जमाने में सही
तुम ही बताओ ,
मुझे तुमसे इतनी आस क्यों है

आज बिखरे से मेरे, अल्फ़ाज़ क्यों है
दरमियान हमारे, यह काश क्यों है

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Behatareen :ok_hand:t2:

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:clap::clap::clap::clap::clap::clap::clap::clap::clap::clap::clap:

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Wah bohot khoob

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