फरिश्ता

हमेशा माफ़ करते आए हो, मेरी गुस्ताखियां
मेरी हर एक आंच को खुद तुमने सहा है
मै जितनी बार रूठी हूं तुमसे आे खुदा मेरे,
बेइंतहा प्यार तुमने मुझसे किया है
नज़र न लगे कभी मेरी नजर को
हमेशा ये तुमने की है गुज़ारिश
मेरे गमो की जलती आग में
दुआओ में तुमने मागी है बारिश
मुझको जहां में फरिश्ता मिला है
कोई और वो नहीं वो मेरी ही मां है

स्वाती सिंह चौहान

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Wow. :heart:

:heart:

:heart::heart:

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Wah

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Thanks