यहां हैवान बसते हैं

नंग-धड़ंग यह फूल जगत के
कोमलता को परिभाषित करते
शैशवकाल की स्निग्धता की कलियां
मासूमियत को परिभाषित करते

क्यों छोड़ती है मां, फिर इनको बाहर
भूल के, इन मानव में दानव छिपते है
शिशु हो या हो वयस्क, हर किसी को
एक नजर से देखते है

अनाचार को परिभाषित करते यह
नरक से उठ कर आए है
हर डगर पर , खामोश है चंचलता
क्योंकी हर डगर पर इनके साये है

व्यभिचारी बन यह नीच दरिंदे
खुले आम अब दिखा करते है
वासना से ग्रसित यह दानव रूप
हर किसी को इक नजर से तका करते है

शैशव में यौवन का रूप
कैसे इनको दिखता है
कलंकित होती कोख भी उसकी
जो इस दानव को जनता है

मां तुम रक्षक हो , अपनी बगिया की
देखो भक्षक देह हर ओर छिपे है
थामा दो आंचल मोह का अपना
यहां मानव में , दानव छिपे है

सूरत से सामान्य भले यह
दानव रूपी फितरत है
कैसे खिले कोई कली पुष्प की
यहां हर मोड़ पर दानव रहते है

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nice :clap::clap: @Ashutosh_Burnwal

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