इतवार की सुबह

प्रतिक्षा की वेदी पर
तुम्हारा स्मरण
सुखद अनुभूति का परिचायक होता
जीवन के इस भागदौड़ के मध्य
तुम्हारा स्मरण
पूर्ण विश्राम सा प्रतीत होता
और तुम्हारे आने की कल्पना मात्र से
तुम्हारी प्रतिक्षा में बीते दिन
बौने लगते
कदाचित मेरे ये स्वप्न
सत्य की तलहटी पर उपज जाते
काश ! तुम इतवार की सुबह होती !

©मनीष रोहित गराई✍

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bohot khoob likha hai…
and Welcome to YoAlfaaz :heart:

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bahut khoob sabdo ka prayog or bahut khoob hai ye rachna

Welcome to YoAlfaaz family @manishgarai
Keep writing and sharing

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Thank you so much for your kind words.

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Beautiful words