मुख़तसर कहानी

कहानी मुख़तसर थी
जो पढ़ने से पहले खत्म हुई

तेरी सादगी उल्फत सी थी
जो निभाने से पहले खत्म हुई

तेरा इश्क़ नफ़ासत सा था
जो दिखने से पहले ढल गया

तू रात सी थी और मैं सूरज
जो तेरे आनेसे पहले ढल गया

  • रितेश घटमाळे
7 Likes

Just beautiful. :two_hearts:

1 Like

nice @RiteshGhatmale

1 Like

Congratulations :clap::heart_eyes:

1 Like

Thank you @Wordsbyritti