आज तुम्हारे बारे में सुना मनीषा

आज तुम्हारे बारे में सुना मनीषा और मेरी आँखे आंसूओ से भर गयी। आज मैं निशब्द हूँ , इंसानियत कही खो गयी इसलिए।

सुनो मनीषा, तुम इस देश की बेटी हो,
तुम किसी की वासना का शिकार हुई,
और वो शिकारी बहार घूम रहा है।
तुम्हे उठना होगा,
और ये लड़ाई लड़नी होगी,
हम सब तुम्हारे साथ है।
बहुत रोये हम और तुम,
अब बारी है उन्हें रुलाने की।

देश ये सारा बार ड्रग्स के पीछे पड़ा है,
और आज अचानक तुम्हारी खबर सुन,
सब झूठा दिखावा करेंगे।
हक़ीक़त तो ये है की,
शिकार तो हमेशा छोटे वर्ग को होने पड़ता है,
फिर ये समाज कहता है की आरक्षण हटाओ,
पहले तुम दलित कहना छोड़ो,
और इनकी इज्जत करना सीखो,
जब तुम एक समान किसी को मान नहीं सकते,
तो तुम आरक्षण हटाने की बात कैसे कर सकते हो??
कभी सवाल करो खुदसे की, ये सब है क्यों??

देश में क्या हो रहा है,
खबर नहीं युआ को,
बस चूर वो नशे और वासना में,
अगर अपनी माँ - बहन की बात आती है,
तो ऐसे भड़कते है की पूछो मत,
पर दुसरो की बहन के साथ,
बलात्कार करने का अधिकार है इन्हे,
उनकी ज़िन्दगी नीलाम करने का शोक है इन्हे।

क्या कुसूर था मनीषा का?
ये की वो दलित वर्ग की थी?
या ये की वो एक लड़की थी?
अरे ! थोड़ी तो शर्म करलो।
उस लड़की की जीभ काट दी,
स्पाइनल कोड को क्षति पहुंचाई,
वो रोई भी होगी,
चीखी छिलाई भी होगी,
पर उन लोगो को,
कुछ सुनाई नहीं दिया,
वासना जो पीकर बैठे थे वो।

अंत में इतना कहूंगी,
की जो सोये है,
वो उठ जाओ।
कल कोई ओर इसका शिकार बने,
उससे पहले उसे सशक्त करो,
और जाती का भेद करना छोड़ दो ।

-रितिका गुसाईवाल

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Wonderful @Wordsbyritti

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No words. :broken_heart:

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