तुम पथ भ्रमित न होना

जीवन में शिक्षक ही अपने शिष्य को राह दिखाते हैं ऐसा ही मेरी लेखनी में लिखा गया हैं । एक शिष्य जो अपने जीवन में विफल हो रहा हैं और मार्ग से भटक रहा हैं उसके लिए यह कविता हैं
यहाँ पार्थ शिष्य हैं

कविता की पंक्तियाँ कुछ इस प्रकार हैं

हे पार्थ तुम पथ भ्रमित न होना
लेखनी का लेख अनूठा
जीवन का हैं सार निराला
निरन्तर दृष्टि तुम रखना
कल का नहीं पता किसी को
खुद ही तुम जाग्रत रहना
हे पार्थ तुम पथ भ्रमित न होना

हैं धूमिल छवि इस जीवन की
तुमको दर्पण बनकर हैं रहना
सत्य पथ के गुण को ऊंचाईयों तक हैं छुना
विकट समय में जीवन को निरन्तर हैं जीना
हे पार्थ तुम पथ भ्रमित न होना

हैं द्वेष अगर तन-मन में तो मैत्री को तुम राह बनाना
असत्य को छोडकर कटु वचन को तुम अपनाना
बिना रुके सफलता अनगिनत प्रयास तुम करना
हे पार्थ तुभ पथ भ्रमित न होना

लेखक- निशु भारद्वाज

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Bohot khub. :heartpulse:

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thank you dear
hope you understand my wordings

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Some of the words are difficult as I am not that good at reading hindi, but I surely understood the motivation behind it. Greatly written. :blue_heart:

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Thanks a lot

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