खेल समय का

यह हौसला है , जो खे रहा है
तेरी नाव को भी , रेत में
तू कर्म कर ,लहरा उठेगी ,
फसल इस बंजर खेत में
मत पूछ क्यों है अकेला,
यूं तू अपने मन से रोज
देख सूरज को , जो चलता , जलता अपने तेज़ में
प्राण वायु कर प्रवाहित,
जला चेतना की आग को
राह में जो अटकलें हो,
कर दे उनको राख तू
वर्षा से ना डर तू प्यारे ,
श्वास को तू आग कर
बारिश की हर बूंद को तू क्षण से पहले भाप कर
तू सवारी नाव का है
अटकलें तो आएंगी
चक्का यह चलता रहेगा , ऋतुएं बदलती जाएंगी
पतझड़ है , किस्मत में तो ,
वसंत भी इक दिन आएगा
फिर देख तेरे नाम का सिक्का कैसे
चमकता जाएगा

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Wonderfully written
Keep posting
@Ashutosh_Burnwal
Welcome to @yoalfaazfamily

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Bohot hi khub likha hai apne. :blue_heart:
Welcome here, hope to see more of your writings. :handshake:

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धन्यवाद और ज़रूर कोशिश रहेगी कि , अगला लेख भी आपको पसंद आए

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Ha @Ashutosh_Burnwal
:smile:

beautiful @Ashutosh_Burnwal
welcome in yoalfaaz family :bouquet::bouquet::bouquet:

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