वतन-ए-इश्क

मुझे मंजूर है रांझा
ये बदनामी जहर पीना
कहो वह इश्क ही है क्या
जहां मर के न हो जीना

यहां मशहूर है देखो
जारा वीर के चर्चे
मुझे मंजूर मैं राधा तुम्हें घनश्याम है बनना

मेरे इस प्यार में शिकवे हैं गिला है क्या?
खुदा कंधे की मजबूती, कहीं से कम हुई है क्या?
ये तेरी जान वारी है मुझमें मानती हूं मैं
पहले हक तेरी माता का इतना जानती हूं मैं

तू जाएगा तो रोना है
न जाएगा तो खोना है
वतन के सामने आशिकी
एक छोटा खिलौना है

मुझे मालूम है, दिल में मेरे
मातम सा जाएगा, मगर विश्वास है मुझको
मेरा घनश्याम आएगा
वतन की रक्षा कर वापस,मेरा घनश्याम आएगा #mega-competition#

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अति सुंदर, नायाब, बहुत खूब @Chauhan :ok_hand:
और
आपका YoAlfaaz परिवार में स्वागत हैं
मुस्कुराते रहिए, लिखते रहिए, जगमगाते रहिए :slightly_smiling_face:

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धन्यवाद

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:slight_smile:

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Bohot ki khub likha hai. :heart:
Welcome here, do write more. :heart::heart:

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Thank u sir

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Thanks mam

Wah bohot khoob. Keep it up

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Thanks hamida

Bhahut sunder

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Shukirya

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