मुहब्बत बेहिसाब होती है

मुहब्बत को नापलें ऐसे पैमाने नहीं बने
कुछ तो बात मुहब्बत में खास होती है
कभी गिने चूने एहसासों में भी
मुहब्बत बेहिसाब होती है।

बेलिबाज़ होना तो शर्त नहीं मुहब्बत की
इबादतें तो अकसर पुरलिबाज़ होती है।
कभी गिने चूने एहसासों में भी
मुहब्बत बेहिसाब होती है।

कभी फ़रियाद करने पर भी नहीं मिलती
कभी दाखिल ज़िंदगी में बेआवाज़ होती है।
कभी गिने चूने एहसासों में भी
मुहब्बत बेहिसाब होती है।

कभी ढ़लके भी शामों सी शफक छोड़ जाती है
कभी उजालों में भी अंधेरे मोड लाती है
कभी मासूम तो कभी चालबाज़ होती है
कभी गिने चूने एहसासों में भी
मुहब्बत बेहिसाब होती है ।
हमीदा

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बहुत खूब, क्या खूब सजोया है @Hamida :slightly_smiling_face:
और
आपका YoAlfaaz परिवार में स्वागत हैं
मुस्कुराते रहिए, लिखते रहिए, जगमगाते रहिए :slightly_smiling_face:

Beautifully written. :heart:

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Thank you

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Thanks a ton

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bhot hi pyara likha h ma’am @Hamida :heartbeat: :smiling_face_with_three_hearts:

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nice @Hamida

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