रफ़ी साहब की दीवानगी...🎤।

जब भी ग्रामोफ़ोन की टूटी सी कैसेट को देखता हूँ,
संगीत के उसी सुनहरे दौर के बारे मे सोचता हूँ ।
वह फ़कीरी ,वह मौसीक़ी का ताजदार था ,
एक रफ़ी के आवाज़ की ख़ातिर ज़माना बेक़रार था ।

वह था सुरीला सा फ़रिश्ता गीतों के जहान का ,
वह था पाश्व गायक , बड़े ही ऊँची शान का ।
आज शोर ओ शराबों मे, उसी मख़मली आवाज़ को ढूंढता हूँ,
आज राग और आलापों मे ,उसी रफियाना अंदाज़ को ढूंढता हूँ ।
दिल घमघिन हो जाता है , बिना आवाज़-ए-रफ़ी के ,
आज गायकों की महफ़िल मे उसी गीतों के सरताज को ढूंढता हूँ ।

कभी जॉनी वॉकर की आवाज़ बन हसाया था हमे
कभी दिलीप कुमार की आवाज़ बन रुलाया था हमे ।
कभी शमी कपूर की आवाज़ बन थिरकाया था हमे ,
कभी देव साहब की आवाज़ बन गुद-गुदाया था हमे ।
कभी भजन सुना के भक्ति भाव जगाया था ,
कभी क़व्वाली की धुन पर सबको नचाया था ।
कभी ग़ज़ल की लहरों मे हमे बहाया था ,
कभी सृंगार रस का मज़ा चखाया था ।
हर गायकी को सहज रूप से जिसने अपनाया था ,
वही संगीत सम्राट मुहम्मद रफ़ी कहलाया था ।

दौर आते रहेंगे , दौर जाते रहेंगे …,
हर दौर मे गायक गीत गाते रहेंगे ।
लेकिन न तेरे जैसा कोई आयेगा ,
न तेरे जैसा कोई आया था ।
सुरों के बेताज बादशाह तूने ,
किसे नहीं दीवाना बनाया था ।

आज तेरे जन्मदिन पर ,
निकल रही है यादों की बारात आँखों से ।
न जाने क्यों खुदा ने तुझे अपने पास बुलाया था ।

  • शाहीर रफ़ी
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Finding true art has always been a matter of conflict

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