मुझसे तुम अब कभी न मिलना

तुझसे मिलने की आरज़ू हैं कब से,
पर जब-जब कहूं मैं मिलने को तुझसे,
तुम हर बार यही करना,
हर बार मुकर जाना,
एक दिन भूल जाऊंगी तुझे,
इसी भरम में जीने देना मुझे,
अभी जो तुझे देख कर भर जाती हैं आंहे मेरी,
नज़रे जो तुझी पे रुक जाती हैं मेरी।।

मुझे एक बार बिना चौके तुझे देख कर गुजरना हैं…
मुझे एक रोज़ अपने सब्र पे गुरूर करना है…

सुनो मैं कहूंगी तुझसे मिलने को,
तुम हर बार यही करना, हर बार मुकर जाना…
मुझसे तुम अब कभी ना मिलना…:rat:

-आरोही इनायत

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Great one
Nice rhythm and rhyming
Flow too is so smooth :clap::clap::clap:

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Beautifully expressed. :heart_eyes::heart:

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Bhut khoob. :sunflower:

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nice @Arohi_Inayat