इस बार भी सावन निकल गए

एक बस तुझको पाने की ज़िद है मुझे
जीत हो या मैं हारूँ मुझे क्या पता,
सांस इस आस में सिर्फ़ होगी मेरी
तुम मेरी हो मुझे इतना होगा पता।।

मेरा छोटा सा दिल दिल में सुंदर सा घर
साफ है स्वच्छ है गंगाजल की तरह,
लाओ नाज़ुक क़दम द्वार पर दिल के तुम
तुझको मेरी मोहब्बत का है वास्ता।।
एक बस तुझको पाने की…

जी रहा था मैं बैरंग सी ज़िन्दगी
हर तरफ़ बस अंधेरा था बिखरा हुआ,
राह में दीप बनकर जो तुम मिल गये
मिल गया ज़िन्दगी को नया रास्ता।।
एक बस तुझको पाने की…

होगी साकार स्वप्नों की दुनिया मेरी
हाथों में जो मेरे अब तेरा हाथ है,
लड़खड़ा जाएं मेरे क़दम ग़र कभी
थाम लेना मुझे बनके गुमाश्ता।।
एक बस तुझको पाने की…

©श्रीकान्त दुबे✍🏻

#mega-competition

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Wonderful post
@Shrikant
Welcome to @yoalfaaz
Keep posting
:blush::heartpulse::bouquet:

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Beautifully written. :heart:
Welcome to YoAlfaaz, keep posting. :heart:

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Well penned🌸 Welcom to @yoalfaaz

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nice sir … :slight_smile:
welcome in yoalfaaz family :bouquet::bouquet:@Shrikant

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