एक सा हुआ है भाव!

जज़्बात आपके भी,
जज़्बात हमारे भी,
मिलते है कही ना कही,
टकराते है इधर उधर।
लिखने का उद्देश्य एक,
पर सबके अल्फ़ाज़ अलग।

जज़्बात आपके भी,
मिलते तो है हमसे,
कभी बारिश बनके,
कभी इश्क़ बनके,
कभी ख्वाब बनके,
कभी जवाब बनके।

जज़्बात आपके भी,
बया कर जाते है,
हालात हमारे भी,
पर ज़िक्र नहीं होता,
एक खौफ है,
कही छूूट ना जाए,
ये साथ हमारा।

जज़्बात आपके भी,
जज़्बात हमारे भी।

  • रित्ती
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